मौसमे – नौ – बहार

  मौसमे – नौ – बहार अच्छा था सच में पहला वो प्यार अच्छा था अब मिले तो कशिश ने…

गजल

बात कर सच्ची घुमाना छोड़ दे छोड़ दे जिद्द हर बहाना छोड़ दे सोच दुनियाँ में दुखी हैं और भी…

गजल

बोलो करोगे क्या तुम, ये मेरी जान लेकर यानी फ़कीर का इक उजड़ा मकान लेकर जब उड़ गए परिंदे ,…

गजल

मंजिलों से जुदा हो गए रास्ते जब खफा हो गए नर्म हो कर झुके जब कभी लोग सारे ख़ुदा हो…

गजल

आँख में कुछ नमी- सी बाक़ी है दिल में रस्साकशी- सी बाक़ी है सूखे – सूखे से लब ये कहते…

गजल

गिले – शिकवे हैं रुसवाई बहुत है इसी कारण ही तन्हाई बहुत है बनाने को मुकम्मल दर्द मुझ को तेरी…